जुल्म सितम का विरोध है विश्व कुदस दिवस : डा. अली चिगनी

नई दिल्ली, 30 मई (वेबवार्ता)। आज विश्व कुदस दिवस पूरी दुनिया में धरना प्रदर्शन और रैलियों के रूप में पूरी दुनिया में मनाया जायेगा। भारत में भी जंतर मंतर पर अमन और मानवता प्रेमी रैली कर कुदस दिवस मनाएंगे। उक्त जानकारी मौलाना जलाल हैदर नकवी ने मीडिया से बातचीत के दौरान दी।


मीडिया से बातचीत करते हुए ईरान के भारत में राजदूत अली चगिनी ने बतलाया कि यह दिन अर्थात कुदस दिवस फिलिस्तीनियों पर ढाहे जा रहे जुल्मो सितम के विरोध में मनाया जाता है। फिलस्तीन का मसला आलमे इस्लाम और इंसानियत का मसला है। यह हमारे दीन, कुरान और रमजान का मसला है। यहूदियों की कोशिश है कि फिलस्तीन को भुला दिया जाए। जबकि उनको अंदाज़ा भी नहीं है कि यह मसला अल्लाह से जुदा हुआ है।


यह सिर्फ जमीन का टुकड़ा भर नहीं है बल्कि इस सर जमीं से सरवर-ए-कायनात हुजूर अकदस स. अ. मेराज तशरीफ़ ले गए। उन्होंने कहा कि जब तक सूर-ए-बक्र, सब-ए-कद्र और रमजान है तब तक यह मसला भुलाया नहीं जा सकता। हम उस जमीं के टुकड़े के लिए नहीं लड़ रहे और न ही इसको इस्लाम का मसला मानते है बल्कि यह इंसानियत से जुडा मसला है।


हम भी यहूदी मज़हब के मुखालिफ नहीं है। मूसा अ.स. हमारे नबी है। लेकिन हम उनके मुखालिफ है जो बच्चों, बुजुर्गों और औरतों के साथ जुल्म करते है। उन्होंने उन देशों को भी आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जो हुकूमते कुदस दिवस अर्थात फिलस्तीन डे की मुखालफत करती है तो वह फिर किसकी सेवा कर रही है?


इंसानियत का मसला होने के नाते इस मुल्क हिन्दुस्तान के न जाने कितने लोगों ने फिलस्तीन की आज़ादी की आवाज़ बुलंद की। वहां पर जुल्म परस्तों ने 25 हजार से ज्यादा बच्चो औरतों को क़त्ल कर दिया गया। गाँव देहात क्षेत्र में बेगुनाह मजदूर और किसानो को क़त्ल कर दिया गया। गाजा क्षेत्र को एक जेल में तब्दील कर दिया गया। वहां न तो पीने का पानी है और न रौशनी के लिए बिजली। अस्पताल और शिक्षण संस्थान ज़मींदोज कर दिए गए। वह भी तब जब इंसानियत अपनी तरक्की पर खुश हो रही हों। उसी दौर में एक कौम इंसानी नस्ल परस्ती कर रही है।


फिलस्तीन के बाशिंदे था। तभी से दुनिया भर में विश्व कुदस दिवस मनाया जाता है। इस मौके पर सियासत दां तस्लीम अहमद रहमानी, शिया जामा मस्जिद के इमाम मौलाना मोहसिन तकवी, युनुस सिद्दीकी ने भी मीडिया से अपने विचार रखे। 60 लाख से अधिक आवारा वतन यानि पलायन कर चुके है। उनको अपने मुल्क में इजाजत नहीं दी जाती। जो भी फिलस्तीनी बुद्धजीवी दुनिया में कहीं भी है उनका क़त्ल किया जा रहा है। एक एसी कौम अपने हक की मांग करती है। हम अपील करते है कि मीडिया और तमाम इन्साफ पसंद इंसान इन मजलूमों के हक में आवाज उठाये।


फिलस्तीनी अपने मुल्क में सिर्फ आज़ादी चाहते है। अगर वहां के आवाम की राय जाननी हो तो राय शुमारी करा ली जाए। अपने आप ही लोगों को पता चल जायेगा। लेकिन जुल्म ढहाने वाले तो संयुक्त राष्ट्र की बात नहीं मानते। तो वह किसी अन्य की बात क्यों मानने लगे। इसीलिए फिलस्तीनियों के पास मुकाबले के अलावा कोई और रास्ता ही नहीं बचा है। इस मौके पर उन्होंने बड़े जोश के साथ अपनी रोजेदार जुबान से नारा लगाया हिन्दुस्तान जिंदाबाद, ईरान जिंदाबाद, फिलस्तीन जिंदाबाद।


गौरतलब है कि इस्लामी क्रांति के संस्थापक स्वर्गीय इमाम अयात उल्लाह ख़ुमैनी ने बैतुल मुक़द्दस तथा फ़िलिस्तीन के मुद्दे को जीवित करने के लिए पवित्र रमज़ान के महीने के अंतिम शुक्रवार को विश्व क़ुद्स दिवस मनाए जाने का अह्वान किया।